Friday, 24 November 2017

मोरारी बापू जी की ब्रज चौरासी मानस परिक्रमा

‌"मोरारी बापू जी की ब्रज चौरासी मानस परिक्रमा" ....भारतीय संस्कृति के राजदूत (Ambassador of Indian Culture) मोरारी बापू जी की 801वीं राम कथा "ब्रज चौरासी मानस परिक्रमा" का प्रतिभागी बनकर बड़ी प्रसन्नता अनुभव कर रहा हूं । श्रद्धेय बापू  अपने किशोर वय से ही रामकथा वाचन कर रहे हैं। देश विदेश के कोने -कोने नगर- ग्राम में  रामकथा के विविध सन्दर्भों के द्वारा उन्होने भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों को शिखर प्रदान किया है । इस कड़ी में ब्रज चौरासी मानस परिक्रमा एक अभिनव प्रयोग है। यह  नव दिवसीय कथा भगवान कृष्ण के चरण धुलि से पावन  परिक्रमा चौरासी के नौ ब्रज तीर्थों पर आयोजित की गई।   कथा का उद्घाटन सत्र 11नवंबर को श्रीगोवर्धन में आयोजित हुआ। अगले दिन कामवन, जो सम्प्रति राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है, कथा आयोजित हुई । कृष्ण की सहचरी राधा रानी जी की जन्म स्थली बरसाने में तीसरे दिन का आयोजन हुआ। बांके बिहारी जी की  पावन नगरी वृंदावन, जहां आधार शिविर बनाया गया था  में चौथे दिन की कथा आयोजित हुई ।  अक्रूर घाट  पांचवें दिन की कथा का स्थल था। छठे दिन की कथा का आयोजन मानसरोवर में हुआ। नन्दजी के गांव रमणरेती, गोकुल में कथा का सातवां पड़ाव था । कृष्ण जन्मस्थली मथुरा में आठवें दिन की कथा का आयोजन हुआ।  ब्रज तीर्थों की पावन परिक्रमा करने के पश्चात 19नवंबर को  उद् घाटन स्थल गोवर्धन में ही नवें दिन कथा की पूर्णाहूति हुई। कथा में भारत वर्ष के विविध प्रदेशों के वन्धु भगिनियों की उत्साहपूर्ण उपस्थित देखते बनती थी। अहिन्दी भाषी भाई बहनों के हाथों में उनकी भाषा में रामचरितमानस  की प्रतियां देखकर मैं बड़ा आल्हादित हुआ। यजमान वन्धुओं द्वारा लाखों लोगों के लिए भोजन प्रसाद एवं आवास की उत्कृष्ट  व्यवस्था विना ईश्वरीय प्रेरणा के संभव नहीं। अर्द्धागिनी महोदया अद्योपांत कथा में उपस्थित रहीं, हृदय के अंतरतल से मैं उन्हें शुभकामनाएं संप्रेषित करता हूं।

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