Friday, 24 November 2017

Gandhi Geeta Foundation

"नन्द के दुलार मैं बलिहारी तोरी सुरत पै, हौं तो तुर्कानि, हिन्दुआनि बन रहुंगी मैं" ।  ताज बेगम भगवान कृष्ण के सुललित लीला प्रसंग पर ऐसी मुग्ध हुई कि मुस्लिम युवती  होकर भी उसने  गोपियों सा  जीवन धर्म अंगीकृत किया । आज संध्या जब मैंने वृंदावन के ISKCON   (International Society forKrishna Consciousness) temple में यूरोपीय युवा बालाओं को " हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे ।हर हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।" पर झुमते हुए देखा , तो मैं हर्ष से भावविह्वल हो गया । मैं सोचता हूं कि भगवान कृष्ण के जीवन वृत्त में क्या गुरुत्वाकर्षण है जो देश काल की परिसीमा को लांघ कर समस्त विश्व को अपनी ओर आकृष्ट कर परित्राण करने की सामर्थ्य रखता है । मैंने "कृष्ण" शब्द की व्युत्पत्ति derivation खंगाला । Google में उपलब्ध अनेक interpretations  के अनुसार    'कृष्ण 'अर्थात जो अपने  (सद्)गुणों (attributes) से सबको आकर्षित करें। आकृष्ट, कृष्ट कृष्टल जैसे शब्द  तथा यूनानी Greek भाषा का chrito, German का christa, Christy, Christie इसके ध्वण्यान्तर मात्र हैं ।  ईसाइयों के पिता का पुत्र Christ का नामकरण  Greek के इसी 'Christo' शब्द से हुआ है। Google पर उपलब्ध अनेकोंं अध्ययन बताते हैं कि अपने जीवन के युवा काल में  Jesus Christ  लंबे समय तक भारत  के आश्रमों में रहे । ऋषियों से सानिध्य , आध्यात्मिक ज्ञान, उनके व्यक्तित्व की शुचिता,  उनकी संन्यास वृति ने jesus के मानस पर गहरा प्रभाव डाला ।बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में ही रुस के एक प्रख्यात विद्वान Nicholas Notowicch ने बाइबल, ईशा मसीह , इसाइत  पर भारतीय प्रभाव पर शोध किया है। उन्होने स्थापना की है कि बाइबल में वर्णित Jesus Christ की कहानियां भगवान कृष्ण की विमल कथाओं तथा भगवान बुद्ध की जातक कथाओं के आधार पर गढ़ी गई हैं। ईशाइयों   की missionary वृति भी भारत के बौद्ध धर्म से ही आयातित है। गीताप्रेमी महात्मा गांधी ने श्रीमद्भागवद्गीता  तथा बाइबल के New Testament में  "The Sermon on the Mount" में Jesus Christ के उपदेशों में अद्भुत साम्य होने का उल्लेख अपने अनेक व्याख्यानों तथा लेखों में  किया है । राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने "भारत -भारती" में लिखा है:  "था हिन्दुओं का शिष्य ईसा , यह पता भी है चला । ईसाइयों का धर्म भी है, बौद्ध ढांचे में ढला " ।   ++++++ "ईशा, मुहम्मद आदि  का जग में न था कुछ भी पता । कब की हमारी सभ्यता है , कौन सकता है बता ?" । 

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